जब.देश की आर्थिक प्रगति पिछले पाँच साल से ज्यादा सालों से पांच प्रतिशत से ज्यादा दर से बढ़ रही है तो अचानक उसकि गति ऋणात्मक कैसे हो सकती है।

यह बात सच है कि शहरी इलाकों मे प्रगति की गति धीमी पड़ रही है। परन्तु छोटे और मध्यम शहरों मे आर्थिक उन्नयन की संम्भावना कम नहीं हुई है।

जब तक कोइ अभूतपूर्व घटना न घटे मंदी की कोइ संम्भावना नहीं है।