आर्थिक आसमानता, भारत की उन्नति और विकास में अवरोध उत्पन्न करती है। भलेही भारत की आर्थिक विकास दर विश्व में सबसे अधिक है फिर भी ये बढ़ती हुई आर्थिक असमानता को करने में असफल है। हमारी विकास कि रणनीति इस आर्थिक असमानता को दूर करने में असफल रही है।

आर्थिक असमानता कि परिभाषा –

भारत में आर्थिक असमानता को चार भागों में विभक्त किया जाता है

. आय में असमानता

. लोगो के खर्च व व्यय में असामनता

. संपत्ति में असमानता

. क्षेत्रीय असमानता

भारत में आर्थिक असमानता इस प्रकार बिद्धमान की भारत की कुल कमाई का 90% हिस्सा 1% लोगो के पास है बाकी 10% पूंजी 90% लोगो के पास है। यह पूंजी के आसमान वितरण को दर्शाता है।

उपभोग व व्यय में व्याप्त असमानता एक ऐसी स्तिथि को दर्शाती है जिसमें व्यय करने वाले लोगो की संख्या बहुत कम तथा उपभोग करने वालो की संख्या बहुत अधिक है। ये स्तिथि एक बात परिमाण है कि एक बहुत बड़े वर्ग को अपना जीवन जीने के लिए बहुत अधिक संघर्ष करना पड़ता है परन्तु इसके विपरित बहुत कम लोग है को उच्च कोटि की जीवन शैली प्राप्त होती है।

क्षेत्रीय असमानता के द्वारा एक ऐसी स्तिथि का पता चलता है कि क्यों भारत के तटीय राज्य सबसे ज्यादा कमा के देते है ओर बही उत्तर तथा उत्तर पूर्व के राज्यो को सरकार द्वारा हर साल बहुत अधिक मात्रा में धन राशि देनी पड़ती है जो भारत के राजकोषीय घाटे को बढ़ाने में काफी हद्द तक जिम्मेदार है।

भारत में आर्थिक असमानता की प्रकृति एवं सीमा।

भारत में आर्थिक असमानता की की गणना उपभोग वितरण ओर आय कर के आधार पर की जाती है। भारत में आय के वितरण की जांच करने के लिए एक आयोग गठित किया गया जिसको महालनोविस आयोग कहते है। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1964 में सामने रखी!

भारत में आर्थिक असमानता के कारण –

  1. सम्पत्ति के मालिकाना हक में असमानता
  2. विरासत के नियम
  3. संगठित क्षेत्र में नौकरियों कि कमी
  4. पेशेवर सेवाओं की शिक्षा में कमी
  5. मंहगाई
  6. बेरोज़गारी
  7. कर संग्रह में कमी
  8. भ्रष्टाचार ओर काले काम
  9. राजनीतिक criminalization

Ye सभी कारण है जो भारत में आर्थिक असमानता के लिए जिम्मेदार है।

धन्यवाद।